IPO क्या है? जाने सभी जानकारी हिन्दी मे | What is IPO In Hindi?

नमस्कार दोस्तों, आज हम इस आर्टिकल के माध्यम से यह जानेंगे की IPO क्या है? (What is IPO In Hindi) और ipo लॉन्च करने की प्रक्रिया क्या हैं? IPO के लाभ और नुकसान क्या है। IPO मे कितने प्रकार के होते हैं? Ipo मे निवेश केसे करें। ऐसे कई महत्व पूर्ण पॉइंट को हम आज इस आर्टिकल मे जानेंगे।

आज भारतीय शेयर मार्केट में IPO की काफी चर्चा हो रही हे। और जिस प्रकार पिछले कुछ टाइम मे कई आईपीओ ने जो रिटर्न दिया है, तब से IPO अप्लाइ करने की होड लगी है। और कई नए निवेशक IPO में निवेश करके अछे लिस्टिंग गेन से पैसे बनाना चाहते हैं, तो दूसरी ओर कुछ निवेशक लम्बे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। जिनमे अधिकतर रिटेल निवेशक शुरुआती लाभ (लिस्टिंग गेईन) के लिए ही IPO में अप्लाई करते हैं।

भारत मे कई निवेशकों को IPO के बारे में सही जानकारी नहीं होने के कारण कई निवेशक अपने कैपिटल को आईपीओ मे फसा देते है। मे यहा नए निवेशकों के बारे मे बात कर रहा हु, नाकी जो बहोत अनुभवी हे। तो चलिए दोस्तों Ipo के Basic को आसान भाषा मे समजते है। इस आर्टिकल से IPO से जुड़े आपके हर सवाल का जवाब मिल जाएगा।

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IPO क्या है? | What is IPO In Hindi?

IPO का मतलब हे, INITIAL PUBLIC OFFERING.

IPO को इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग कहा जाता है। और ipo को हिन्दी मे सार्वजनिक प्रस्ताव या पब्लिक इशू भी कहा जाता हैं। IPO को आसान भाषा मे कहे तो एक प्राइवेट कंपनी या कॉर्पोरेट कंपनी अपने शेयर जनता को बेचकर सार्वजनिक हो सकती है। IPO किसी कंपनी द्वारा लाया जाता हैं जो पहले से कोई व्यापार कर रही हो।

IPO के माध्यम से किसी कंपनी द्वारा पहली बार अपने शेयर्स जनता को बेचने के लिए ऑफर किये जाते हैं। आईपीओ लाने वाली नई कंपनी या पुरानी कंपनी हो सकती है। आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के साथ, कंपनी अपने शेयरों को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध कराती है।

IPO को प्राइमरी मार्केट के अंतर्गत गिना जाता हैं। IPO के आने के बाद कंपनी के शेयर्स ट्रेडिंग के लिए स्टॉक एक्सचेंज  में लिस्ट हो जाते हैं। ये लिस्टिंग दोनों स्टॉक एक्सचेंज (NSE और BSE) पर की जाती हैं। जो कंपनी अपना IPO मार्केट मे लाती हे, वह कंपनी issuer कहलाती हैं। कंपनियां इसे जनता के लिए नए शेयर जारी करके धन जुटाने के लिए तैरती हैं। हालांकि, मौजूदा शेयरधारक भी नई पूंजी जारी किए बिना अपनी हिस्सेदारी जनता को बेच सकते हैं।

IPO कितने प्रकार के होते हैं?

भारत मे मुख्य दो प्रकार के IPO होते हैं। 1. निश्चित मूल्य प्रस्ताव और 2. बुक बिल्डिंग ऑफर। यह दोनों प्रकार को हम विस्तार रूप से समजते है।

निश्चित मूल्य प्रस्ताव (Fixed Pricing Offer):

इस प्रकार के ipo में कंपनी ऑफर किये जाने वाले शेयर्स की कीमत पहले से तय किए हुए रहते हैं। Fixed Pricing Offer में निवेशको को पहले से ही शेयर्स की कीमत का पता होता हैं। IPO अप्लाई करने पर निवेशक को अनिवार्य रूप से Full share price पर Bid लगाना रहता हैं। निश्चित मूल्य प्रस्ताव में शेयर्स के डिमांड का पता ipo बंद होने के बाद लगता हैं।

बुक बिल्डिंग ऑफर। (Book Building Offer):

इस प्रकार के IPO में कंपनी के द्वारा शेयर का प्राइस-बैंड तय किया जाता हैं। और इस प्राइस-बैंड के आधार पर निवेशको के IPO में अप्लाई करना रहता हैं। Book Building Offer में निवेशकों को lot के हिसाब से अपनी bid में विवरण देना होता हैं, की वे कितने रुपये के लिए आवेदन करेंगे और एक शेयर की निवेशक कितनी कीमत देना चाहते हैं। कंपनी ने एक शेयर के लिए जो प्राइस-बैंड तय किया निवेशकों को उसी दायरे मे एक प्राइस तय करके ipo का अप्लाइ करना रहता है।

IPO लाने के कारण | Reasons to bring IPO

कंपनियों को अपने ऋणों के पुनर्भुगतान के लिए धन की निरंतर आवश्यकता होती है। आवश्यकताओं के आधार पर, एक कंपनी धन जुटाने के लिए IPO को लाती है। एक आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के माध्यम से, कंपनी के शेयर स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध होते हैं। यह स्टॉक की तरलता को बढ़ाता है जो विभिन्न कर्मचारी स्टॉक स्वामित्व योजनाओं को बढ़ावा देता है।

सार्वजनिक होने से कंपनी की साख और ब्रांड वैल्यू बढ़ती है। स्टॉक एक्सचेंजों पर कंपनी का नाम फ्लैश होना कंपनी के लिए गर्व की बात है। जब बाजार में मांग अधिक होती है, तो कंपनी अधिक संख्या में स्टॉक जारी कर सकती है। यह कंपनी के लिए विलय और अधिग्रहण के लिए द्वार खोलता है क्योंकि सौदे के बदले में स्टॉक जारी किए जा सकते हैं।
IPO लाने के और भी कई कारण हे, जो की नीचे सूचीबद्ध हम सभी कारणों को विस्तार रूप से जानेंगे।

1. कर्ज भुगतान हेतु:

कई बार कंपनी  पर अधिक कर्ज हो जाता हैं। बैंक से अधिक कर्ज या लोन लेने की बजाय कंपनी अपना कुछ प्रतिसत हिस्सेदारी बेचकर IPO के माध्यम से धन जुटाती हैं। IPO के माध्यम से कंपनी धन जुटाकर अपना कर्जा कम करती हैं। और उस वजह से कंपनी के ऊपर वित्तीय बोझ नहीं पड़ता, जिससे वो अच्छा प्रदर्शन के अपने निवेशकों को अच्छा रिटर्न दे पाती है।

2. व्यापार वृद्धि और विस्तार हेतु:

जब कंपनी अपने व्यापार के वृद्धि और विस्तार करना चाहती हो, जेसे की नया यूनिट लगाना, नयी सर्विस शुरू करना, मार्केट मे नया प्रोडक्ट लाना ऐसे बहोत से कारणों के लिए कंपनी को  अधिक धन राशि की आवश्यकता होती हैं। और ऐसी स्थिति में कंपनी बैंकों से लोन लेने के बजाय IPO के द्वारा धन जुटाती है।

3. Offer for sale:

कई कंपनी मे कुछ प्रतिसत बिक्री के लिए प्रस्ताव किए जाते है। Offer for sale का मतलब पुराने इन्वेस्टर अपना हिस्सेदारी बेचना चाहते हो। कंपनी के शुरुआती दिनों मे संस्थापक अपने व्यापार को बढ़ाने हेतु बड़े निवेशकों को अपनी एक्विटी का कुछ हिस्सा बेचते है।

4. प्रतिष्ठा हेतु:

कंपनी स्टॉक एक्सचेंज में पंजीकरण कर अपनी विश्वसनीयता और प्रतिष्ठा को बढ़ाना चाहती है। और शेयर बाजार में लिस्टिंग होने से कंपनी की लिक्विडिटी भी बढ़ती है।

वेसे तो दोस्तों IPO लाने के और भी कई कारण हो सकते है। लेकिन उपर बताए गए मुख्य कारण हे, और जिससे आपको ये समज जाएंगे की कंपनीया IPO क्यू लाती है।

IPO लाने की प्रक्रिया | IPO Process In India

बाद में, दोनों पक्ष अंडरराइटिंग समझौते और आवश्यक दस्तावेजों के साथ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के साथ पंजीकरण विवरण दाखिल करते हैं। सेबी उसके बाद जमा किए गए विवरण के विवरण के माध्यम से जाता है और यदि प्रस्तुत की गई जानकारी सही पाई जाती है, तो यह कंपनी को अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश की घोषणा करने के लिए एक तारीख आवंटित करती है।

एक कंपनी को IPO लाने के लिए बहोत लम्बी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता हे, जो विस्तार से सभी पॉइंट्स को नीचे बताया गया हे।

Step 1:- मर्चेंट बैंकर को नियुक्त करना:

IPO को लाने से पहले कंपनी जो पहला काम करती है, वह यह हे, की ipo की प्रक्रिया को संभालने के लिए एक मर्चेंट बैंकर को नियुक्त करना है। आईपीओ के विभिन्न वित्तीय विवरणों पर काम करने के लिए मर्चेंट बैंकर और कंपनी के बीच एक अंडरराइटिंग समझौता किया जाता है। मर्चेंट बैंकर कंपनी के सभी या कुछ हिस्से को खरीदकर कंपनी के शेयरों को अंडरराइट करता है और इसे जनता को बेचता है। इस मर्चेंट बैंकर का चयन कंपनी को IPO पर सलाह देने और underwriting सर्विस देने के लिए किया जाता हैं।

Step 2:- रेगुलेटरी फाइलिंग (Regulatory Filing):

इस चरण मे दोनों पक्ष अंडरराइटिंग समझौते और आवश्यक दस्तावेजों के साथ भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के साथ पंजीकरण विवरण दाखिल करते हैं। और इस प्रक्रिया मे कंपनी को पिछले कुछ सालों का बैलन्स शीट, प्रॉफ़िट-लॉस स्टेटमेंट, कर्जे की डिटेल्स, ऐसे सभी दस्तावेजों को SEBI के सामने प्रस्तुत करना रहता हे। उसके बाद जमा किए गए विवरण के माध्यम से SEBI पूरी जांच करता है, और यदि प्रस्तुत की गई जानकारी सही पाई जाती है,

Step 3:- मूल्य निर्धारण (Pricing):

Pricing की जिम्मेदारी मर्चेंट बैंक निभाते हैं। पहले कंपनी का valuation निकाल जाता हैं। उसके बाद, पूरा ipo की साइज़, ipo lot साइज़, शेयर प्राइस ऐसे कई महत्व पूर्ण पॉइंट को तय किया जाता है। और announce किया जाता हे। और फिर कंपनी को अपनी आरंभिक सार्वजनिक पेशकश(IPO) की घोषणा करने के लिए एक तारीख आवंटित करती है।

Step 4:- वितरण चरण (Distribution):

इस प्रक्रिया मे IPO को अलग-अलग केटेगरी मे विभाजित किया जाता हे। भारत मे मुख्य तीन प्रकार के निवेशको के लिए आईपीओ को विभाजित किया जाता हे, 1: QIB, 2: NII (HNI), 3: Retail investors. इन सभी category पर हम आगे विस्तार से चर्चा करंगे।

Step 5:- IPO आवेदन प्रक्रिया:

अब जब SEBI आईपीओ को अप्रूव कर दे, मूल्य निर्धारित कर दिया जाए, वितरण प्रक्रिया, ऐसे सारे चरण पूरे हो जाने के बाद में निवेशकों से आवेदन किए जाने की प्रक्रिया आती हे।और आवेदन करने के लिए निश्चित तारीखे (Dates) निर्धारित किए जाते हैं। जब आप IPO अ आवेदन करते हे, तो जो lot की price हे वो आपके बैंक खाते मे block करदी जाती है।

Step 6:- आवंटन प्रक्रिया (Allocation process):

जब आवेदन की प्रक्रिया पूरी हो जाए, तब अलॉटमेंट की प्रक्रिया शुरू किया जाता हैं। जो भी निवेश को शेयर लॉट Allocate हुए हे, उनके बैंक मे जो अमाउन्ट ब्लॉक किया गया था उसे डेबिट करके मर्चेन्ट को ट्रांसफर कर दिया जाता हे, और allotted शेयर को आपके Demat खाते में क्रेडिट कर दिए जाते हैं। यह पूरी प्रक्रिया मे 2 या 3 कार्यदिन  का समय लगता है।

Step 7:- सूचीकरण (Listing):

जब निवेश के Demat account मे शेयर अलॉट हो जाते हे, तो 2 से 3 कार्यदिन में कंपनी के शेयर को स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर लिस्ट किया जाता है। और शेयर की लिस्टिंग होने के बाद सेकेंडरी मार्केट में ट्रेड होने लगते हैं।

Step by Step Process for New IPO Listing in India| IPO basic to advance information in Hindi
IPO Process in India – Initial Public Offering (IPO) Steps Guide in Hindi

IPO सूचीपत्र क्या हैं? | What is an IPO prospectus

IPO सूचीपत्र का मतलब हे IPO Prospectus.

जो भी कंपनी IPO लाना चाहती है, उनका एक दस्तावेज़ रहता हैं। और जिसमे कंपनी के बारे मे सभी जानकारी होती हैं, जेसे की कंपनी किस सेक्टर मे काम करती हैं, कंपनी के प्रोडक्टस क्या है? कंपनी के भविष्य के क्या प्रोजेक्ट हे।  प्रमोटर कौन हैं, कंपनी के ग्राहक कौन हैं, और वित्तीय डेटा, ऐसे कंपनी की सभी जानकारी।

भारत मे IPO Prospectus दो प्रकार के होते हैं, 1. IPO Draft Prospectus (DRHP) और 2. IPO Red Herring Prospectus (RHP or IPO Final Prospectus)

1. IPO Draft Prospectus (DRHP):-

इस प्रकार DRHP में कंपनी के IPO के बारे में पूरी जानकारी बताई हुई होती हैं। और DRHP के लिए आपको SEBI से अप्रूवल के लिए IPO को सबमिट किया जाता हैं।

2. IPO Red Herring Prospectus (RHP or IPO Final Prospectus):-

इस ड्राफ्ट मे IPO से जुड़ी सभी जानकारी होती है, जैसे IPO कब open and close होगा। IPO मे एक शेयर की कीमत कितनी होगी, IPO के एक lot मे कितने शेयर होंगे, और कंपनी के वित्तीय डेटा, अंडरराइटर ऐसे सभी पॉइंट इस ड्राफ्ट मे बताए होते है।। इस ड्राफ्ट को आईपीओ फाइनल प्रॉस्पेक्टस कहा जाता है।

दोस्तों, किसी भी आईपीओ में निवेश करने से पहले हमे आईपीओ प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से पढ़ना चाहिए। यह ड्राफ्ट आप कंपनी के official website से या अन्य कोई third party से download कर सकते है।

IPO के लाभ | Advantages of IPO

IPO का सबसे बड़ा फायदा यह है, कि कंपनी की वित्तीय जरूरतों को पूरा करता है। अपने व्यापार के विकास के लिए पूंजी हासिल करना, और बड़े पैमाने पर व्यापार विस्तार के लिए IPO से फंड लेना एक आसान विकल्प है। इससे कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर सकती है और नए उपकरण हासिल कर सकती है। यह अपने ऋणों का भुगतान करने में भी मदद करता है।

आरंभिक सार्वजनिक पेशकश के साथ, कंपनियों के शेयर विलय और अधिग्रहण के लिए उपलब्ध हैं। साथ ही यदि कंपनी किसी अन्य कंपनी का अधिग्रहण करना चाहती है, तो कंपनी के शेयर भुगतान के साधन के रूप में कार्य कर सकते हैं। यह प्रतिभाशाली कर्मचारियों को आकर्षित करता है क्योंकि कंपनी उन्हें कई स्टॉक विकल्प प्रदान कर सकती है और उन्हें अपेक्षाकृत कम वेतन पर किराए पर ले सकती है।

कंपनी के मालिकों को अपनी कंपनी को स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करके उनकी मेहनत का प्रतिफल मिलता है। IPO में, वे अपने लिए कंपनी में एक निश्चित प्रतिशत शेयर प्राप्त कर सकते हैं और एक सूचीबद्ध कंपनी होने की प्रतिष्ठा का आनंद ले सकते हैं।

IPO के नुकसान | Disadvantages of IPO

IPO एक लंबी प्रक्रिया है और इसके लिए बहुत सारे कानूनी अनुपालन की आवश्यकता होती है। यह कंपनी को उसके मुख्य व्यवसाय से विचलित करता है, और कंपनी के मुनाफे में संधे लगा सकता है। साथ ही, कंपनियों को IPO की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए मर्चेंट बैंकरों को नियुक्त करना होता है, और बदले में वे मोटी फीस लेते हैं।

कई मामलों में, व्यवसाय के मालिक अपने लिए उतने शेयर नहीं ले पाते हैं। कई बार लॉक-इन अवधि के कारण वे बाजार में अपने शेयर नहीं बेच पाते हैं। इसलिए, व्यापार मालिकों को कभी-कभी IPO लाने पर नुकसान होता है।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) किसी कंपनी द्वारा आरंभिक सार्वजनिक पेशकश जारी करने से पहले कई कागजी कारवाई की जांच करता है। यह प्रक्रिया समय लेने वाली हो सकती है और इसके लिए बड़े खुलासे की आवश्यकता होती है। इसके अलावा, प्रमोटरों को विवरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता होती है, जो प्रतिस्पर्धा द्वारा उपयोग किए जा सकते हैं और उनके व्यवसाय को बाधित कर सकते हैं।

IPO निवेशकों के प्रकार हैं? | What are the types of IPO investors

चलिए अब हम यह जानते हे, की कितने प्रकार के निवेशक IPO मे निवेश करते है। भारत मे इसे 4 केटेगरी मे बाटा गया है।

  1. Retail Individual Investors(RII):
  2. Non-Institutional Investor(NII):
  3. Qualified institutional investors (QIIs):
  4. Anchor Investor:

आइए अब इन सभी कैटेगरी को विस्तार से समझते हैं।

1. Retail Individual Investors(RII):

RII जिसे हिन्दी मे खुदरा व्यक्तिगत निवेशक कहते है। इस केटेगरी मे रेजिडेंट इंडिविजुअल और NRI और HUF भी शामिल होते हैं। खुदरा कोटा के तहत एक निवेशक 2 लाख तक की ही धन राशि का IPO में अप्लाई कर सकते हैं। Retail Individual Investor केटेगरी मे न्यूनतम आवंटन 35% होती है। इस केटेगरी में Cut off प्राइस से आवेदन कर सकते है।

SEBI के आदेश अनुसार यदि IPO ओवरसब्सक्राइब होता है, तो उपलब्धता के अधीन, सभी खुदरा निवेशकों को कम से कम एक लॉट के शेयर आवंटित किए जाएंगे। यदि एक लॉट भी प्रत्येक निवेशक के लिए संभव नहीं है, तो जनता को शेयर आवंटित करने के लिए एक लॉटरी प्रणाली का उपयोग किया जाता है।

2. Non-Institutional Investor(NII):

NII जिसे हिन्दी मे गैर-संस्थागत निवेशक और इन्हे HNI: High net-worth individuals भी कहा जाता हे। HNI का हिन्दी मतलब अच्छी निवल संपत्ति वाले शख़्स होत है। इस केटेगरी मे निवेशक 2 लाख से अधिक धन राशि का IPO में अप्लाई कर सकते हैं। NII केटेगरी में Cut-off  प्राइस से आवेदन नहीं किया जाता।

HNI/NII को शेयरों का आवंटन आनुपातिक आधार पर होता है, चलिए इसे एक उदाहरण से समजते है,

यदि कोई (HNI&NII) 10,000 शेयरों के लिए आवेदन करता है, और IPO को 10 गुना सब्सक्राइब किया जाता है, तो उन्हें (10,000/10) 1,000 शेयर आवंटित किए जाएंगे। इसका मतलब है कि उन्हें हमेशा शेयर आवंटित किए जाते हैं, भले ही IPO ओवरसब्सक्राइब हुआ हो या नहीं।

QII और NII के बीच के अंतर कि बात करे तो, NII को SEBI के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता नहीं होती है। जबकि QII को SEBI के साथ पंजीकरण करने की आवश्यकता होती है।

3. Qualified institutional investors (QIIs):

QIIs का अर्थ योग्य संस्थागत निवेशक होता है।

QIIs की श्रेणी मे वाणिज्यिक बैंक, सार्वजनिक वित्तीय संस्थान, म्यूचुअल फंड हाउस और SEBI के साथ पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक आते हैं।

अंडरराइटर्स IPO के शुरू होने से पहले बड़ी मात्रा में IPO के शेयरों को आकर्षक कीमत पर बेचने की कोशिश करते हैं। QIIs को शेयर बेचने से अंडरराइटर्स को लक्षित पूंजी हासिल होने मे मदद मिलती है। IPO लॉन्च करने वाली कंपनी के लिए QII विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि शेयर बाजार में कीमत की खोज होने से पहले अंडरराइटर्स उन्हें IPO शेयर की पेशकश करते हैं।

यदि QIIs अधिक शेयर खरीदते हैं, तो आम जनता के लिए कम संख्या में शेयर उपलब्ध होंगे। इससे शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी होगी। यह परिदृश्य एक कंपनी के लिए आदर्श है क्योंकि वे अधिक से अधिक पूंजी जुटाना चाहते हैं।

हालांकि, सेबी ने यह सुनिश्चित करने के लिए नियम बनाए हैं कि कंपनियां आईपीओ मूल्यांकन को विकृत न करें। यही कारण है कि नियामक संस्था कंपनियों को QIIs को 50% से अधिक शेयर आवंटित करने की अनुमति नहीं होती है। इस केटेगरी में भी Cut off  प्राइस से आवेदन का विकल्प नहीं होत है।

3. Anchor Investor:

कोई भी QII, जो 10 करोड़ रुपये से अधिक का IPO मे आवेदन करता है, वह एक एंकर निवेशक है। ऐसे निवेशक आमतौर पर अन्य निवेशकों को भी लाते हैं। योग्य संस्थागत निवेशकों के लिए 60% तक शेयर एंकर निवेशकों को बेचे जा सकते हैं।

IPO में निवेश कैसे करे? | How to invest in IPO?

Initial public offering मे एक सामान्य व्यक्ति भी निवेश कर सकते है। या एक अवयस्क (minor)  भी आईपीओ में अप्लाई कर सकता है। पहले के मुकाबले आज IPO मे निवेश का करना आसान हो गया हैं। IPO में निवेश करने के लिए एक बैंक खाता और डीमेट खाता होना आवश्यक हैं। आपको IPO मे निवेश करने के लिए Demat and Trading account की जरूरत रहती हैं।

जब आप IPO अप्लाइ करेंगे, और आपको शेयर अलोट किए जाएंगे तो वो आपके Demat Account मे जमा होंगे। और उन शेयर को बेचने के लिए आपको Trading Account की जरुरत होती हैं। और इस तरह IPO मे निवेश करने के लिए Demat and Trading account अनिवार्य होता है। IPO Offer 3 से 5 कार्यदिन के लिए खुला रहता हैं। इन कार्यदिन के दौरान सुबह के 10 बजे से शाम के 5 बजे तक अप्लाय कर सकते है।  

IPO में मुख्य दो तरीके से अप्लाइ कर सकते है, 1.ASBA और 2.UPI ये दोनों ही तरीके बहोत आसान हे, चलिए इनको विस्तार से जानते है,

  1. ASBA: Application supported by Blocked amount (ASBA) जिसे हिन्दी मे अवरुद्ध राशि द्वारा समर्थित आवेदन कहा जाता है। यह बहोत ही आसान प्रक्रिया हे,इसमे ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए ASBA द्वारा आप किसी भी IPO में निवेश कर सकते हैं। लेकिन इसके लिए भी आपको Demat account number और  PAN number की आवश्यकता रहती है।
  2. UPI द्वारा: SEBI की नई गाइडलाइंस के मुताबिक अब UPI के जरिए IPO में भी निवेश कर सकते हैं। UPI के माध्यम से IPO के लिए आवेदन करने के लिए, आपके पास UPI ID होना चाहिए। इस पद्धति में आपको अपने स्टॉक ब्रोकर के माध्यम से आवेदन जमा करना होगा। इसमें खाताधारक के UPI से पेमेंट करना अनिवार्य है।

यदि आपको आईपीओ आवंटन प्राप्त हुआ है, तो आपका पैसा आपके बैंक खाते से डेबिट कर दिया जाएगा और यदि आवंटन नहीं किया गया है, तो पैसा अनब्लॉक हो जाएगा। आपका पैसा आमतौर पर आवंटन की तारीख से दो दिनों के भीतर अनब्लॉक हो जाता है।

यहां यह जानना महत्वपूर्ण है कि बचत खाते पर ब्याज उस अवधि के दौरान अर्जित होता रहता है जब आपका पैसा आपके बैंक खाते में अवरुद्ध होता है। ब्याज अर्जित करना जारी है क्योंकि आवेदन के समय पैसा डेबिट नहीं किया जाता है, लेकिन बस अवरुद्ध कर दिया जाता है।

निष्कर्ष:

आज पूरे भारत मे शेयर बाजार निवेश का आकर्षक होता जा रहा है। कई लोग शेयर बाजार में निवेश कर रहे हैं, क्योंकि शेयर मार्केट से आप कम समय में अच्छा रिटर्न कमा सकते है। निवेशक शेयर मार्केट में प्राथमिक बाजार के माध्यम से या द्वितीयक बाजार के माध्यम से व्यापार करते हैं। प्राथमिक बाजार में कंपनी के आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) पर आवेदन करके शेयर मार्केट में निवेश करना शुरू करते है, जबकि द्वितीयक बाजार में स्टॉक एक्सचेंज से सीधे शेयर खरीदना और बेचना शामिल रहता है।

अब आपके भी मन मे यह सवाल होगा की, क्या हमे भी शेयर मार्केट मे निवेश करना चाहिए?

यह कहते हुए बहोत आनंद हे, की पिछले कुछ वर्षों में आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों (IPOs) ने निवेशकों को आकर्षक रिटर्न दिया है। लेकिन आपको निवेश करने से पहले कंपनी और उसके प्रबंधन के बारे में शोध कर लेनी चाहिए। भारत मे हर महीने बहुत सारे IPO की सूची आती रहती है, आपको बस उच्च क्षमता वाली कंपनियों को ढूंढना है, और उनमें निवेश करना है। ध्यान रखें, कोई भी कंपनी के IPO में निवेशकरने से पहले कंपनी के महत्वपूर्ण जानकारियां जुटा लेनी चाहिए। इसके लिए आप कंपनी के फाइनेंसियल डाटा और प्रॉस्पेक्टस का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आज के हमारे इस लेख से आपको IPO के  basic to advance के बारे में जानने में मदद करेगा। इस आर्टिकल के माध्यम से IPO क्या हैं? IPO के कितने प्रकार होते हे? कंपनीया IPO क्यों लाती? IPO के लाभ और नुकसान क्या है? ऐसे सभी महत्व पूर्ण पॉइंट्स की विस्तार रूप से चर्चा की हे, जिससे हमारे नए निवेशको को बहोत मदद होगी। नए IPO लॉन्च किए गए सार्वजनिक कंपनियों में निवेश करना बेहद फायदेमंद हो सकता है। हालाँकि, आपको यह भी ध्यान रखना चाहिए, कि यह जोखिम भरा भी हो सकता है और लंबे अवधि मे मुनाफे की गारंटी नहीं है।

यह Article को पूरा पढ़ने के लिए आपका बहुत धन्यवाद,

आपको हमारा यह आर्टिकल (IPO क्या है? | What is IPO In Hindi? ) केसा लगा Comment करके हमे जरूर बताए। अगर यह आर्टिकल से आपको सही जानकारी मिली हो, तो अपने दोस्तों को भी Share करिए। और ऐसी ही Share Market Daily updates और Share market की basic जानकारी के लिए Social media पर हमे Join करें।

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